शाहजहाँपुर।जनपद में हर साल बाढ़ और जलभराव से होने वाली तबाही के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने गर्रा नदी तट पर स्थित विभिन्न कलवर्टों (पुलियों) का बारीकी से निरीक्षण किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाढ़ के समय नदी के पानी को आबादी वाले इलाकों में घुसने से रोकना है।
एडीएम के नेतृत्व में टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरविन्द कुमार के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने मौजमपुर कैनाल से लेकर नगरिया मोड़ तक गर्रा नदी के किनारे स्थापित 7 छोटी-बड़ी कलवर्टों और पुलियों का स्थलीय मुआयना किया। इस दौरान टीम ने नदी के किनारे विभिन्न स्थानों पर किए गए मार्ग उच्चीकरण (सड़क ऊँची करने) के कार्यों का भी जायजा लिया।
लोहे के फ्लैप गेट और रेगुलेटर लगाने की योजना
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि तहसील सदर क्षेत्र के अंतर्गत राई खेड़ा गांव से नगरिया मोड़ तक गर्रा नदी के किनारे जितने भी कलवर्ट हैं, उन पर लोहे के फ्लैप गेट (Flap Gate) या रेगुलेटर लगाने की संभावनाओं का जल्द से जल्द तकनीकी अध्ययन किया जाए।इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए बरेली के नलकूप खंड वर्कशॉप के सहायक अभियंता ने भी कलवर्टों का तकनीकी निरीक्षण किया है। इस संयुक्त निरीक्षण और तकनीकी अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर एक विस्तृत प्रस्ताव (Proposal) तैयार कर शासन को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
बाढ़ का बैकवाटर रोकने में मिलेगी मदद:अमूमन देखा गया है कि मानसून के दौरान जब गर्रा और खन्नौत जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ता है, तो नदी का पानी इन कलवर्टों और पुलियों के रास्ते (बैकवाटर के रूप में) ग्रामीण और शहरी आबादी वाले क्षेत्रों में घुस जाता है। इससे बड़े पैमाने पर जलभराव और तबाही होती है।प्रशासन का मानना है कि कलवर्टों पर फ्लैप गेट या रेगुलेटर लग जाने से बाढ़ के समय पानी की इस अनियंत्रित आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को जलभराव की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।









