गोरखपुर: 10 साल की बच्ची से हैवानियत के बाद हत्या, बर्खास्त सिपाही गिरफ्तार; घटना के 3 घंटे बाद जन्मा भाई

गोरखपुर: 10 साल की बच्ची से हैवानियत के बाद हत्या, बर्खास्त सिपाही गिरफ्तार; घटना के 3 घंटे बाद जन्मा भाई

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जिला अस्पताल में भर्ती अपनी बीमार बहन को खाना देने गई 10 साल की मासूम बच्ची को घर छोड़ने का झांसा देकर एक पुलिस सिपाही ने अगवा कर लिया। इसके बाद श्मशान घाट के एक कमरे में उसके साथ दुष्कर्म (हैवानियत) किया और निर्मम हत्या कर शव को नदी में फेंक दिया।पुलिस ने आरोपी सिपाही को गिरफ्तार कर सेवा से बर्खास्त कर दिया है। उस पर पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA/रासुका) लगाने की कार्रवाई की जा रही है।

श्मशान घाट पर हैवानियत, पोस्टमॉर्टम में हुआ दर्दनाक खुलासा

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने बच्ची के साथ श्मशान घाट स्थित एक कमरे में बर्बरता की:

बच्ची के पैर और गर्दन समेत 5 हड्डियां टूटी हुई मिलीं।

हाथ की उंगलियां कटी हुई थीं और पेट फटने की वजह से आंतें बाहर आ गई थीं।

प्राइवेट पार्ट पर बेहद गहरे जख्म के निशान थे।

हैवानियत के बाद आरोपी ने बच्ची के हाथ पीछे बांधकर उसे नदी में फेंक दिया, जहां सिर पत्थर से टकराने और सांस फूलने की वजह से उसकी मौत हो गई।

अंतिम संस्कार के 3 घंटे बाद मां ने बेटे को दिया जन्म

28 जुलाई की रात से गायब बच्ची का शव 36 घंटे बाद (गुरुवार सुबह) चिऊटहां पुल के नीचे नदी से बरामद हुआ। गुरुवार शाम करीब 6 बजे राजघाट पर नम आंखों से पिता ने बच्ची को मुखाग्नि दी।इस दुखद घड़ी के बीच, अंतिम संस्कार के महज 3 घंटे बाद अस्पताल में भर्ती बच्ची की मां ने एक बेटे (भाई) को जन्म दिया।

बड़ी बहन का दर्द: 7वीं में पढ़ने वाली बच्ची की बड़ी बहन ने रोते हुए बताया— “मेरी बहन हमेशा मां से कहती थी कि इस बार रक्षाबंधन पर मेरा भाई आएगा, मैं उसे राखी बांधूंगी। लेकिन वह यह दिन देखने से पहले ही चली गई। उसका सपना पढ़-लिखकर डॉक्टर बनने का था।”

CCTV और बाइक के नंबर से पकड़ा गया आरोपी

पीड़ित परिवार मूल रूप से आजमगढ़ का रहने वाला है और गोरखपुर में ई-रिक्शा चलाकर गुजारा करता है। 27 जुलाई को बड़ी बेटी की तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 28 जुलाई की रात 8:30 बजे 10 साल की छोटी बेटी अस्पताल में खाना देने आई थी।रात 10 बजे अस्पताल से निकलते वक्त यूपी पुलिस की डायल-112 में तैनात सिपाही अभिषेक यादव ने उसे घर छोड़ने का झांसा दिया। CCTV फुटेज में बच्ची सिपाही की बाइक पर बैठती दिखी। पुलिस ने 200 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगालकर बाइक के नंबर से आरोपी की पहचान की और उसे हिरासत में लिया, जिसके बाद उसने जुर्म कबूल कर लिया।

अस्पताल परिसर में डॉक्टरों और नर्सों ने आरोपी को पीटा

गुरुवार दोपहर करीब ढाई बजे जब पुलिस टीम आरोपी सिपाही अभिषेक यादव को मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल ले गई, तो वहां मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने आरोपी सिपाही को दौड़ा-दौड़कर पीटा। पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे भीड़ से बचाया।

आरोपी का विवादित ट्रैक रिकॉर्ड और पत्नी का बयान

जनवरी 2025 में बंगाल की एक महिला से छेड़छाड़ के आरोप में वह 9 महीने जेल में रहा था और सस्पेंड हुआ था। सितंबर 2025 में ही उसकी बहाली हुई थी।

पत्नी का गुस्सा: आरोपी की पत्नी अपनी 13 साल की बेटी और बेटे के साथ गाजीपुर मायके में रहती है। पत्नी ने कहा, “उसने जो किया है, वह माफी के लायक नहीं है। मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि मुझे दोबारा कभी उसके साथ न रहना पड़े। हमारी भी एक बेटी है, वह अब समाज में किस मुंह से अपनी बेटी की आंखों में देखेगा?”

परिजनों की मांग

पीड़ित परिवार ने आरोपी को जल्द से जल्द फांसी की सजा देने, 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। जिला प्रशासन ने मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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