बरेली में फिर गूंजी शहनाई: बचपन की मोहब्बत के लिए महजबीन बनी ‘लक्ष्मी’, हिंदू रीति-रिवाज से रचाई शादी

बरेली में फिर गूंजी शहनाई: बचपन की मोहब्बत के लिए महजबीन बनी 'लक्ष्मी

बरेली।प्यार न सरहदें देखता है और न ही मजहब की दीवारें। कुछ ऐसा ही नजारा उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में देखने को मिला है, जहाँ एक मुस्लिम युवती ने अपने बचपन के प्यार को पाने के लिए सनातन धर्म अपना लिया। शीशगढ़ क्षेत्र के जाफरपुर गांव की रहने वाली महजबीन ने पड़ोस के गांव के रहने वाले विशाल संग हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए हैं। धर्म परिवर्तन के बाद अब महजबीन को नया नाम ‘लक्ष्मी’ मिला है।

8वीं क्लास से शुरू हुई थी लव स्टोरी

मिली जानकारी के अनुसार, लक्ष्मी (महजबीन) और विशाल की मुलाकात स्कूल के दिनों में हुई थी। दोनों आठवीं कक्षा से एक-दूसरे को जानते थे और समय के साथ यह दोस्ती गहरी मोहब्बत में बदल गई। इंटरमीडिएट (12वीं) की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों बालिग हो गए, लेकिन अलग-अलग धर्म होने के कारण दोनों के ही परिवार इस रिश्ते के खिलाफ थे। अपनों के विरोध के आगे झुकने के बजाय दोनों ने जीवन भर साथ निभाने का फैसला किया और घर से कदम बाहर निकाल लिए।

अगस्त्य मुनि आश्रम में विधि-विधान से हुई शादी

दोनों प्रेमी युगल बरेली के प्रसिद्ध अगस्त्य मुनि आश्रम पहुँचे। यहाँ आश्रम के आचार्य के.के. शंखधार ने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महजबीन का शुद्धीकरण और धर्म परिवर्तन कराया, जिसके बाद उनका नाम ‘लक्ष्मी’ रखा गया। इसके बाद अग्नि को साक्षी मानकर विशाल और लक्ष्मी ने सात फेरे लिए और हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए।”मुझे सनातन धर्म की परंपराओं पर पूरा भरोसा है। इस धर्म में महिलाओं को अपनी बात रखने और खुद को अभिव्यक्त करने की पूरी आज़ादी है। यहाँ न तो तीन तलाक का डर है, न हलाला का दर्द और न ही बुर्के या नकाब की बंदिशें।”— लक्ष्मी

पहले भी मंदिर जाती थीं लक्ष्मी

शादी के बंधन में बंधने के बाद लक्ष्मी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह पहले भी विशाल के साथ अक्सर मंदिर जाया करती थीं और सनातन धर्म के प्रति उनकी गहरी आस्था थी। फिलहाल, इस अनोखी शादी की चर्चा पूरे इलाके में है और सोशल मीडिया पर भी लोग इस नवविवाहित जोड़े को नए जीवन की शुभकामनाएं दे रहे हैं।

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