पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने की गेंद अब राज्यों के पाले में, केंद्र नहीं करेगा पहल

पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में राज्य करे पहल

नई दिल्ली:देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इन्हें वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाने की बहस एक बार फिर तेज हो गई है। पिछले एक महीने में ही पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों में 7.50 रुपये प्रति लीटर तक का भारी इजाफा हो चुका है। हालांकि, आम जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार खुद आगे बढ़कर कोई कदम नहीं उठाने जा रही है। वित्त मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की पहल खुद राज्यों को ही करनी होगी। राज्य चाहें तो जीएसटी काउंसिल में इस मुद्दे पर बहस की शुरुआत कर सकते हैं।

GST में आने से कितना सस्ता होगा तेल?

विशेषज्ञों और आंकड़ों के मुताबिक, अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो इन पर अधिकतम 28 प्रतिशत टैक्स लगेगा।

इसके विपरीत, वर्तमान व्यवस्था में जनता पर टैक्स का बोझ बहुत ज्यादा है:

अभी का टैक्स: केंद्र सरकार का उत्पाद शुल्क (Excise Duty), राज्यों का वैट (VAT) और अलग-अलग सेस (Cess) मिलाकर उपभोक्ताओं को खुदरा कीमत पर 45 प्रतिशत से अधिक टैक्स चुकाना पड़ रहा है।

वैट कटौती पर केंद्र का रुख: कई राजनीतिक दल और विशेषज्ञ राज्यों से वैट (VAT) घटाने की मांग कर रहे हैं ताकि जनता को तुरंत राहत मिले। लेकिन वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने साफ किया है कि केंद्र ने राज्यों को वैट कम करने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया है और न ही आगे ऐसी कोई योजना है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम और आगे क्या होगा?

इस समय पश्चिम एशिया संकट (विशेषकर ईरान युद्ध और तनाव) के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है।कंपनियों को भारी नुकसान: बढ़ती कीमतों के बावजूद खुदरा दामों को एक सीमा में रखने के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को फिलहाल रोजाना 500 से 600 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।

अब केंद्र से नहीं मिलेगी वित्तीय मदद

सूत्रों के अनुसार, ईरान युद्ध शुरू होने से पहले केंद्र सरकार ने तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को 1.23 लाख करोड़ रुपये की बड़ी वित्तीय सहायता दी थी, जिसकी वजह से 78 दिनों तक दाम नहीं बढ़े थे। लेकिन अब केंद्र सरकार ने हाथ खींच लिए हैं। आगे कंपनियों को कोई वित्तीय मदद नहीं दी जाएगी, जिसका साफ मतलब है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में और भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती

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