नेपाल के रसुवा ज़िले में आए भीषण भूकंप और उसके बाद हुए हिमस्खलन ने भोटेकोशी एवं त्रिशूली नदियों में प्रलयकारी बाढ़ ला दी है। इस अचानक आई आपदा ने नेपाल के विभिन्न ज़िलों में भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाली पुलिस के अनुसार, इस आपदा के बाद से 579 पर्यटक लापता हैं, जिनमें 100 से अधिक भारतीय नागरिक शामिल हैं। 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल में यह सबसे भयानक प्राकृतिक आपदा मानी जा रही है।
तबाही का मुख्य कारण: भूकंप और हिमस्खलन
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए बताया कि रसुवा ज़िले में सुबह करीब 8:37 बजे आए भूकंप के बाद हिमस्खलन हुआ। इसके कारण सुबह 8:40 बजे भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और भयंकर बाढ़ आ गई।इस बाढ़ की चपेट में आने से रसुवा और नुवाकोट ज़िलों के तिमुरे, स्याफ़रुबेसी, बेत्रावती, त्रिशूली बत्तर और देवीघाट जैसे इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। विदेश मंत्री ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित किया है।
लापता पर्यटकों का आंकड़ा और स्थिति
बाढ़ के कारण नेपाल की यात्रा पर आए सैकड़ों देशी और विदेशी पर्यटक फंस गए हैं या लापता हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड और टूर ऑपरेटरों के अनुसार, लापता भारतीयों में से अधिकांश कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले श्रद्धालु थे।

ऐतिहासिक त्रिशूली बाज़ार पूरी तरह जलमग्न
नुवाकोट स्थित ऐतिहासिक त्रिशूली बाज़ार (जिसे ‘संगुबाज़ार’ भी कहा जाता है) बाढ़ के पानी में लगभग आधा बह चुका है। 500 से अधिक घरों और 2,000 से अधिक आबादी वाले इस क्षेत्र में भारी तबाही हुई है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त: त्रिशूली जलविद्युत संयंत्र, नए और पुराने कंक्रीट के पुल, त्रिशूली स्कूल, मंदिर और स्थानीय रिहायशी मकान बाढ़ में बह गए हैं।
बचाव में देरी: चेतावनी जारी होने के बावजूद कई स्थानीय लोगों को बाढ़ की भयावहता का अंदाजा नहीं था, जिससे वे समय रहते सुरक्षित स्थानों पर नहीं जा सके। फिलहाल प्रभावित लोग विदुर और पास की कॉलोनियों में शरण ले रहे हैं।
नेपाल-चीन व्यापार मार्ग और लाइफलाइन ठप
भोटेकोशी नदी के किनारे का रसुवा क्षेत्र नेपाल और चीन (तिब्बत) के बीच मुख्य व्यापारिक मार्ग का काम करता है। बाढ़ के कारण हाईवे, प्रमुख पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स नष्ट हो गए हैं। चीन के सरकारी मीडिया चैनल सीसीटीवी ने भी तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि की है।
भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सहयोग
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आपातकालीन बैठक कर चिकित्सा टीमों, रेड क्रॉस और नेपाल स्काउट्स को राहत कार्यों में तैनात कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश: भारतीय पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर बात कर शोक व्यक्त किया और कहा कि भारत संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ खड़ा है। भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता और बचाव दल भेजे जा रहे हैं।
चीन से मदद: सरकारी प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने बताया कि भारत और चीन दोनों देशों की सरकारों से लगातार समन्वय किया जा रहा है और दोनों देशों ने आपातकालीन सहायता देने का आश्वासन दिया है।
राहत, बचाव और अलर्ट
नेपाल सरकार ने प्रभावित ज़िलों को अगले तीन महीने के लिए ‘आपदा संभावित क्षेत्र’ घोषित कर दिया है। नेपाली सेना और निजी हेलीकॉप्टरों की मदद से रसुवागढ़ी, तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और मैलुंग में फंसे लोगों को निकालने का काम जारी है।
चेतावनी और हेल्पलाइन:
नेपाल गृह मंत्रालय और अमेरिकी दूतावास ने भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के तटीय इलाकों (नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन) में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। हेलीकॉप्टर बचाव सहायता के लिए सरकार ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 1234 जारी किया है।

